Court Marriage क्या होती है और कोर्ट मैरिज कैसे करें?

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Court Marriage Kya Hoti Hai | कोर्ट मैरिज कैसे करें | कोर्ट मैरिज करने के तरीके क्या क्या है | Court Marriage Process Kya Hai | Court Marriage Online Registration Form

दोस्तों जैसे कि आप जानते हैं शादी एक बहुत बड़ी चीज होती है। एक लड़की और एक लड़के के जीवन में। शादी का मतलब होता है कि वह दोनों अपनी जिंदगी एक दूसरे के नाम कर दें। शादी दो लोगों के बीच में सामाजिक या धार्मिक मान्यता का मिलन होता है। और भारत जैसे देश में जहां कई धर्म और रीति रिवाज है। वहां शादियां भी अलग रीति-रिवाजों के हिसाब से होती हैं। लेकिन एक कोर्ट मैरिज ऐसी है जो परंपरागत शादी से बहुत अलग होती हैं।  भारत देश में शादी अपने अपने रीति रिवाजों से मान्यता तो होती है। लेकिन इसके बावजूद भी शादी कानूनी तौर पर होना जरूरी होती है। जिसके लिए आपको Court Marriage के सभी नियमों और उसकी पूरी जानकारी का पता होना जरूरी है। आप सभी लोग जानते होंगे कि कोर्ट मैरिज क्या होती है |

Court Marriage क्या होती है?

 कोर्ट मैरिज एक तरह की कानूनी शादी होती है भारत में हर शादी को कानूनी शादी होना अनिवार्य है। कोर्ट मैरिज का मतलब है एक लीगल मैरिज दो जनों के बीच में चाहे वह  एक ही धर्म के हो चाहे अलग-अलग धर्म के हो।  स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत हर शादी को कानूनी शादी होना जरूरी है तो Court Marriage का मतलब है शादी करना कोर्ट में जो  कानूनी तौर से हो।

Court Marriage

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Importance Of Marriage Registration Certificate

कोर्ट मैरिज करने के बाद बात आती है मैरिज सर्टिफिकेट की जिसकी आवश्यकता हमें बहुत सारे कार्यों में पढ़ती है, जैसे कि पासपोर्ट अप्लाई करने के लिए, नया बैंक के अकाउंट खुलवाने के लिए, वीजा अप्लाई करने के लिए और  कई बार तो ऐसा होता है कि कपल्स को शादी के बाद भी विदेशों में भी सेटल होना पड़ता है उसके लिए भी शादी का रजिस्ट्रेशन और उसका सर्टिफिकेट देना आवश्यक होता है।

विवाहित विवाह पंजीकरण

कोर्ट मैरिज करना एक बहुत ही सरल और लोकप्रिय तरीका है लोगों के लिए। इस आसान से दोनों लड़का और लड़की एक ही धर्म के होते हैं या फिर किसी दूसरे धर्म में परिवर्तित होने की इच्छा रखते हैं।वे अपने धर्म के संस्कारों और समारोह जैसे हिंदू विवाह या फिर निकाह आदि के तरीके के साथ शादी करना चाहते हैं। जैसे – आर्य समाज मंदिर या फिर काजी द्वारा संपन्न करा सकते हैं। और तुरंत प्राण पत्र जारी कर सकते हैं। इस तरह के विवाह संपन्न करने में कम से कम 2000 रूपए तक का खर्चा आ सकता है। शादी होने के बाद जिला विवाह अधिकारी के पास जाकर 1000 रूपए की फीस जमा करके कानूनी तौर पर अपना विवाह पंजीकरण किया जा सकता है।

Court Marriage

Court Marriage  में  क्या होना जरूरी है?

 कोर्ट मैरिज के लिए क्या  होना अनिवार्य है आइए आपको बताते हैं।

  •  दूल्हा-दुल्हन वहां होने चाहिए।
  •  तीन आईविटनेस होने चाहिए।
  •  30 दिन का नोटिस पीरियड होना चाहिए।

कोर्ट मैरिज आप कर सकते हैं जब

  • दूल्हा दुल्हन एक दूसरे से रिलेशन में नहीं हो।
  • किसी  कि पहले से कोई वेध शादी ना हुई हो।
  • दूल्हे की उम्र 21 और दुल्हन की उम्र 18 से ज्यादा होनी चाहिए।
  • दोनों को एक दूसरे से शादी करने पर कोई आपत्ति ना हो।
Court Marriage क्या होती है

डॉक्टर अम्बेडकर स्कीम के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता

यदि कोई दलित से अंतर जातीय विवाह कोर्ट मैरिज से करता है तो उस नव दंपति को सरकार द्वारा ढाई लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। नव संपत्ति में से कोई एक दलित समुदाय का होने पर ही यह आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। डॉक्टर अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन इंटर कास्ट मैरिज के तहत ढाई लाख रुपए की रकम दी जाती है। इस विवाह को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत पंजीकृत होना चाहिए और नव दंपति को एक हलफनामा भी दाखिल करना होता है।

क्या कोर्ट मैरिज के बाद तलाक ले सकते हैं ?

कोर्ट मैरिज करने के बाद कोई भी नव दंपत्ति 1 साल तक तलाक नहीं ले सकता है। 1 साल की समय सीमा समाप्त होने से पहले कोई भी पक्ष तलाक लेने के लिए न्यायालय में याचिका दायर नहीं कर सकता। लेकिन कुछ परिस्थितियों में आप 1 साल की सीमा खत्म होने से पहले याचिका दायर कर सकते हैं।

Court Marriage  के फायदे

 पांच कारण  को विचार में रख कर कोर्ट मैरिज करनी चाहिए।

  • पैसे की बचत:  कोर्ट मैरिज करने से आपके पैसे की बचत होती है आपको बड़े-बड़े प्रोग्राम करने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • टेंशन कम होती है:  कभी-कभी बड़ी शादियां को प्यार करने में बहुत ज्यादा  वक्त लगता है और उसमें काफी टेंशन भी होती है। कोर्ट मैरिज से आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं आपका काम बहुत कम समय में और बिल्कुल टेंशन मुक्त हो जाएगा।
  • सुरक्षा प्रदान करता है:  कोर्ट मैरिज दोनों आदमी वह औरत को सुरक्षा प्रदान करता है।
  • कम समय का काम है:  कोर्ट मैरिज करने में ज्यादा समय नहीं लगता बहुत कम समय का काम है।
  • कोई ड्रेस कोड नहीं:  कोर्ट मैरिज करने से आपको कोई ड्रेस कोड करने की जरूरत नहीं आप किसी भी ड्रेस में जाकर शांति से शादी कर सकते हैं।
Court Marriage

कोर्ट मैरिज करने में कितना खर्च आता है?

 कोर्ट मैरिज के प्रोसीजर फीस होती है 500 से 1000 रुपए तक। पर कहा यह जाता है कि आपको कोर्ट मैरिज फाइल करने से पहले अपनी फीस की मालूमात करनी चाहिए।

Rules Of Court Marriage

  • लड़का और लड़की दोनों ही अनमैरिड हो।
  • लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल होनी चाहिए।
  • दोनों की मानसिक हालत ऐसी हो कि विवाह के लिए वैध सहमति देने में सक्षम हों।
  • युवक-, युवती दोनों ही शारीरिक रूप से संतानोत्पत्ति के योग्य हों।

Court Marriage  मे कौन से डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ती है।

कोर्ट मैरिज के लिए आपको:

  • लड़का और लड़की की चार पासपोर्ट साइज फोटो
  • आवास व पहचान का प्रमाण पत्र।
  • जन्म प्रमाण पत्र या दसवीं की मार्कशीट।
  • शपथपत्र कि दाेनों में कोई भी किसी अवैध रिश्ते में नहीं बंधा है।
  • तलाकशुदा के मामले में तलाक का आदेश और विधवा के मामले में पहले के जीवन साथी का मृत्यु प्रमाण पत्र लगाना होगा।
  • गवाहों की फोटो व पैन कार्ड।
  • पहचान के लिए ड्राइविंग लाइसेंस या आधार कार्ड जैसा दस्तावेज।
Court Marriage

Court Marriage  होने के लिए कितना समय चाहिए?

कोर्ट मैरिज होने के लिए 38 से 40 वर्ष के बीच का समय होना चाहिए।

Court Marriage कैसे करें?

 कोर्ट मैरिज करने के लिए आपको एक फॉर्म ऑनलाइन डाउनलोड करना होगा। उसमें होता है  मैरिज का नोटिस और दूल्हा दुल्हन का डिक्लेरेशन। कोर्ट मैरिज के लिए एक नोटिस लिखा जाता है जो दोनों के द्वारा एक डिस्टिक ऑफिसर को दिया जाता है।  दूल्हा-दुल्हन में से वहां उस डिस्टिक में कम से कम शादी के 30 दिन  पहले से वे लोग रह रहे हो।  उसके साथ डेट ऑफ बर्थ और वहां का एड्रेस प्रूफ होना भी अनिवार्य है।

 कोर्ट मैरिज करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें।

  • Notice of intended marriage:  मैरिज के लिए रजिस्ट्रेशन ऑफिस में अप्लाई करें।
  • Publication of notice:  ऑफिसर उसे पब्लिश कर देगा अपने ऑफिस में और लोकल ऑफिस में।
  • Objection to marriage:  अगर शादी करने में कोई आपत्ति है तो 30 दिन के अंदर अंदर आप उस आपत्ति को जमा कर सकते हो  मैरिज से पहले  एक्ट इन चैप्टर ll सेक्शन 4 के तहत।
  • The signing of declaration:  दूल्हा-दुल्हन द्वारा एक घोषणा पत्र साइन होगा।
  • Place of marriage: जगह  जगह कोई भी हो सकती है जहां दुल्हन वह दूल्हा रह रहे हो।
  • Certificate of marriage:  अथॉरिटी द्वारा आपको सर्टिफिकेट मिलेगा मैरिज का

Conclusion

 उम्मीद करती हूं मेरा आर्टिकल के माध्यम से आपको समझ आ गया होगा कि कोर्ट मैरिज क्या होती है वह उसे करने का क्या  प्रतिक्रिया  होती है। आगे भी इसी तरह मैं आपको अपना आर्टिकल के माध्यम से हर चीज समझाता रहूंगा।

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