|CT Scan full Form| सीटी स्कैन (CT Scan) क्या है- सीटी स्कैन किन अंगो का किया जाता है

CT Scan Kya Hai और सीटी स्कैन किन अंगो का किया जाता है एवं इसकी फुल फॉर्म क्या होती है व यह कब कराया जाता है जाने हिंदी में

देश में करोना महामारी के कारण जो स्थिति बनी हुई है उस कारण काफी टेस्ट डॉक्टर द्वारा कराए जा रहे हैं और इस वक्त करोना की जांच के लिए सीटी स्कैन सबसे ज्यादा कराया जाने वाला टेस्ट है। आज के समय में हर घर में कोई ना कोई व्यक्ति ऐसा होता है जो बीमार होता है और उनके इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा काफी सारे टेस्ट कराने की जरूरत पड़ती ही है। कभी-कभी लोगों को उन टेस्ट के बारे में जानकारी ना होने के कारण थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं।

इसलिए आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से CT Scan से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले हैं जैसे सिटी स्कैन क्यों कराया जाता है? किन बॉडी पार्ट्स का कराया जाता है दोस्तों अगर आप भी सिटी स्कैन से संबंधित थोड़ी बहुत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें |

CT Scan Kya Hai?

सीटी स्कैन की फुलफॉर्म Computed Tomography होती है। सीटी स्कैन को Computerized Axial Tomography के नाम से भी जाना जाता है। सीटी स्कैन का आविष्कार सीटी को ब्रिटिश सरकार ने सर गॉडफ्रे हंसफील्ड और डॉ एलन कॉर्मैक ने डेवलप किया गया था जिसके लिए उन्हें वर्ष 1979 नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। यह टेस्ट हॉस्पिटल में ही कराया जाता है। यह टेस्ट एक्सरे ओर कंप्यूटर के मदद से किया जाता है। इसमें मनुष्य के शरीर के अंदर के कुछ विशेष हिस्सों की फोटो बन कर आ जाती है जिससे कि शरीर के अंदर होने वाली बीमारी का पता आसानी से लगाया जा सकता है।

जब किसी को गंभीर रूप से चोट या शरीर के किसी हिस्से में फ्रैक्चर हो जाने पर CT Scan कराया जाता है। इसके अलावा कराने से शरीर के अंदर की बीमारी कितनी है और शरीर के कितने हिस्से में फैली हुई है उस से रिलेटेड हर एक चीज सामने आ जाती है।

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सीटी स्कैन कब कराया जाता है ?

जब शरीर के किसी हिस्से में गहरी चोट लग जाती है या फिर फ्रैक्चर या बोंस क्रैक हो जाने पर सिटी स्कैन कराया जाता है। इसके अलावा करोना टेस्ट भी डॉक्टर द्वारा सिटी स्कैन कराया जा रहा है। फिजिश‍ियन डॉ अश्‍व‍िनी मल्‍होत्रा का कहना है कि कोविड के केस में डॉक्टर जो CT Scan कराते हैं, वो HRCT चेस्ट यानी सीने का हाई रिजोल्यूशन कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन होता है जिसके जरिए फेफड़ों का इंफेक्शन का पता लगाया जा सकता है। और भी बहुत सी ऐसी बीमारियां है जिनमें सीटी स्कैन कराने की जरूरत पड़ सकती है जैसे ट्यूमर (कैंसर सहित) के स्थान के बारे में जानने के लिए, रक्त वाहिकाओं और अन्य आंतरिक संरचनाओं का अध्ययन, आंतरिक चोटों और आंतरिक रक्तस्राव की मात्रा का आकलन, कैंसर और हृदय रोग आदि।

बिना डॉक्टर की सलाह के कभी भी CT Scan नहीं कराना चाहिए क्योंकि इसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। सीटी स्कैन कुछ हिस्से जैसे सिर, कंधों, रीढ़ की हड्डी, दिल, पेट, घुटना, छाती, आदि का होता है।

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सीटी स्कैन कराने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

  • CT Scan कराने से पहले आपको कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए।
  • सीटी स्कैन कराने से पहले अगर आप आपने अपने हाथ या गले में कोई भी ज्वेलरी पहन रखी है तो उसे ध्यान से उतार दे उसके बाद ही सिटी स्कैन कराएं।
  • पेट का सीटी स्कैन कैसे होता है तो हम बताते पेट कभी सीटी स्कैन होता है सीटी स्कैन मशीन की संरचना कुछ इस प्रकार होती है कि वह शरीर के सारे अंगों को स्कैन कर लेती है।
  • डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही सिटी स्कैन कर आना चाहिए और अगर को भी टेस्ट में सिटी स्कैन कराना है तो करोना संक्रमण के कम से कम 3 दिन के बाद सिटी स्कैन कराना चाहिए।
  • आपको जांच के दौरान हॉस्पिटल गाउन पहनना होगा और मेज पर लेटना होगा।
  • आपकी बाजू की नस में एक डाई डालकर सुई लगाई जाती है। आपको कुछ समय के लिए उत्तेजना या गर्मी महसूस हो सकती है।
  • स्कैन के दौरान बिना हिले डुले लेटे रहें।
  • CT Scan करते समय आपको कई बार सांस रोकने के लिए भी कहा जा सकता है।
  • हर स्कैन के बाद मेज थोड़ी सी सरकती है।

सीटी स्कैन की फीस

वैसे तो CT Scan की फीस ज्यादा नहीं है अगर आप किसी सरकारी हॉस्पिटल में सिटी स्कैन कराने जाते हैं तो केवल 500 रुपए में ही सीटी स्कैन हो जाएगा लेकिन अगर आप किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में सिटी स्कैन कराने के लिए जाते हैं तो आपको लगभग 2000 रुपए से 5000 रुपए तक की फीस देनी पड़ सकती है। इसके अलावा सिटी स्कैन शरीर के अलग-अलग अंगों का होता है जिसके लिए अलग-अलग फीस तय की जाती है।

सीटी स्कैन कराने से नुकसान

  • एक्सरे की तुलना में सीटी स्कैन में ज़्यादा रेडिएशन होता है।
  • आपने कई एक्स-रे या सीटी स्कैन करवाएं हैं तो कैंसर के लिए खतरा समय के साथ बढ़ सकता है।
  • CT Scan करवाने वाले बच्चों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, विशेषकर छाती और पेट में।
  • कुछ लोगों को कंट्रास्ट डाई से एलर्जी हो सकती है। ज़्यादातर कंट्रास्ट सामग्री में आयोडीन होता है, अगर आपको आयोडीन से एलर्जी हो, तो आपके डॉक्टर, आपको एलर्जी की दवा या स्टेरॉयड दे सकते हैं।

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