ई-कॉमर्स (E-commerce) क्या होता है और ई-कॉमर्स पर बिज़नेस कर पैसे कैसे कमाए

ई -कॉमर्स (E-commerce) क्या होता है | ई-कॉमर्स पर बिज़नेस कर पैसे कैसे कमाए | E- Commerce वेबसाइट कैसे शुरू करें

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E-commerce Kya Hota Hai | ई-कॉमर्स पर बिज़नेस कर पैसे कैसे कमाएं | ई-कॉमर्स के प्रकार  | ई-कॉमर्स के फायदे | ई-कॉमर्स के लाभ

ई कॉमर्स को हम Electronic Commerce या Internet Commerce के नाम से भी जानते हैं। बहुत से लोग तो ऐसे हैं जिन्हें यह नहीं पता कि ई-कॉमर्स होता क्या है। सबसे पहले हम आपको बता दें कि ई-कॉमर्स पर आप सभी प्रकार के प्रोडक्ट या सर्विस खरीद या बेच सकते हैं, पैसों का ट्रांसफर और इंटरनेट पर डाटा का आदान-प्रदान करने को ही ई-कॉमर्स कहते हैं। ई-कॉमर्स पर बड़ी ही आसानी से बहुत ही कम समय में अपनी शॉपिंग कर सकते हैं और अगर आप चाहे तो ई-कॉमर्स के माध्यम से अपना बिजनेस करके पैसे भी कमा सकते हैं। भारत में ई कॉमर्स की शुरुआत 2007 में फ्लिपकार्ट के जरिए हुई थी उसके बाद धीरे-धीरे बाकी कंपनी जैसे Amazon, Jabong और Snapdeal ने भी इंडिया में समान बेचना शुरू कर दिए।तो आइए आज हम आपको ई-कॉमर्स से संबंधित सभी जानकारियां जैसे ई-कॉमर्स क्या है? इसके प्रकार, लाभ आदि बताएंगे।

ई-कॉमर्स (E- Commerce) क्या होता है?

ई-कॉमर्स या इंटरनेट कॉमर्स एक तरह से ऑनलाइन शॉपिंग मोड है जिसका इस्तेमाल करके आप चीजें खरीद वा बेच सकते हैं। ई-कॉमर्स के माध्यम से आप इंटरनेट पर डाटा आदान प्रदान, पैसों की ट्रांसफर, मोबाइल रिचार्ज अथवा टीवी रिचार्ज भी आसानी से कर सकते हैं। यह आपका समय बचाता है और बिना बाधा व्यवसाय शुरू करने की अनुमति देता है।

ई-कॉमर्स

API क्या है

E-Commerce के प्रकार

 ई कॉमर्स मुख्य रूप से सात प्रकार के होते हैं।

Business to business model

जो ऑनलाइन बिज़नस दो से अधिक कंपनी, संस्था एवं एजंसी के बीच किया जाता है उसे बिजनेस टू बिजनेस मॉडल कहां जाता है। इस प्रोसेस मैं अंतिम उपभोक्ता आप या हम नहीं होते बल्कि एक दूसरा व्यापार ही होता है जो दूसरे व्यापार से अपनी जरूरत का सामान ऑनलाइन खरीदना है इस बिजनेस में मॉडल में उत्पादक थोक व्यापारी आदि शामिल होते हैं।

 Business to consumer

 जब आप एक प्रकाशक से अपने लिए कोई किताब आर्डर करते हैं तो यह शॉपिंग इस बिजनेस मॉडल में शामिल होती है क्योंकि यहां पर ट्रांजैक्शन सीधा बिजनेस से उपभोक्ता के बीच होता है।

Consumer to consumer

 इस मॉडल पर एक ग्राहक दूसरे ग्रहों से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करता है। इबे,अमेजॉन पर आपको कुछ इसी तरह के मॉडल देखने को मिलते हैं जहां पर एक ग्राहक अपना पुराना सामान तथा नया सामान भी सीधे ग्राहक को बेचता है।

Consumer to business

 जब एक ग्राहक अपना सामान और सेवाएं सीधे एक बिजनेस को भेजता है तो यह ई-कॉमर्स कंज्यूमर टू बिजनेस कहलाता है। एक फोटोग्राफर, कॉमेडियन,यूट्यूब आदि अपने दर्शकों के हिसाब से बिजनेस से उत्पाद प्रचार के शुल्क ले सकता है, और अपनी कुछ सेवाएं रॉयल्टी के आधार पर भी उपलब्ध करा सकता है। यह सभी कार्य इस मॉडल के अंतर्गत आते हैं पेशेवर लोग इस बिजनेस मॉडल से खूब पैसे भी कमा सकते हैं।

 Government to business

 ई गवर्नेंस जिसके तहत सरकारें और प्रशासनिक संस्थान अपनी सेवाएं व्यापारिक संस्थानों को इंटरनेट के द्वारा उपलब्ध कराते हैं। इन सेवाओं की सूची देश काल के हिसाब से अलग हो सकती हैं कानूनी दस्तावेज, ऑनलाइन आवेदन, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, नौकरी प्रावधान और अन्य व्यापारिक सेवाएं सरकारी ऑनलाइन मुहैया करा रही हैं। जिससे सरकार और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का समय और पैसे दोनों बच रहे हैं।

Business to government

 जब सरकारें अपनी जरूरत का कुछ सामान और सेवाएं बिजनेस से ऑनलाइन खरीदी हैं तो इसे बिजनेस टू गवर्नमेंट मॉडल कहा जाता है जैसे किसी लोकल सरकारी एजेंसी को अपने अधिकार क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरास लगवाने हैं और उन्हें लगवाने का ठेका भी किसी बिजनेस को दे सकती है यह सब कार्य इस मॉडल में आते हैं।

Consumer to government

 ई गवर्नेंस सेवा इस मॉडल पर भी जारी है क्योंकि एक आम नागरिक का भी बहुत सारा सरकारी कामकाज रहता है जिसके लिए उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं मगर जब सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है तो ग्राहक सीधे वेबसाइट के जरिए इन सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकता है।

E-commerce

ई-कॉमर्स के लाभ

  • E-commerce की सहायता से आप पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना सकते हैं। अगर आप विक्रेता है तो आपक नए ग्राहक ढूंढने की जरूरत नहीं है।
  • आप आसानी से अपनी पसंद का कुछ भी सामान आराम से देख कर और जानकारी प्राप्त करके खरीद सकते हैं।
  • आप ई-कॉमर्स पर बिना 1 रुपए खर्च करें ऑनलाइन दुकान शुरू कर सकते हैं।
  • लोगों ने माना है कि बाजार जा कर सामान खरीदने से बहुत अधिक समय बर्बाद होता है इसीलिए वक्त की कीमत को देखते हुए ऑनलाइन सामान खरीदना ही बेहतर समझा जाता है।
  • गली की दुकान या मॉल की तरह ऑनलाइन स्टोर का खुलने या बंद होने का समय तय नहीं होता क्योंकि यहां 24×7 शॉपिंग अवेलेबल रहती है।
  • ऑनलाइन शॉपिंग करने में आपको थोड़ा सा ही समय लगता है लेकिन बाहर जाकर शॉपिंग करने में आपका बहुत अधिक समय बर्बाद होता है।
  • ऑनलाइन स्टोर आपके सर्च व्यवहार और पुरानी शॉपिंग के आधार पर आपके लिए प्रोडक्ट की सिफारिश करता है और आपकी पसंद नापसंद के हिसाब से प्रोडक्ट का सुझाव देता है।

E-commerce के नुकसान

  • जब ग्राहक बाहर जाकर शॉपिंग करते हैं तो हम उस आइटम को छू कर देख कर परख लेते हैं लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग करते समय यह सुविधा प्राप्त नहीं होती।
  • अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहते हैं तो आपको डिजिटल साक्षर होने की जरूरत है क्योंकि आपको कंप्यूटर, इंटरनेट, नेटबैंकिंग आदि का ज्ञान नहीं है तो आपके लिए ऑनलाइन शॉपिंग बेकार है।
  • ई-कॉमर्स पर धोखाधड़ी की संभावना सबसे ज्यादा रहती है क्योंकि ऑनलाइन धोखाधड़ी करना ज्यादा आसान होता है और इस बात को लोग नहीं समझ पाते।
  • स्टोर से सामान खरीदते समय हमारी बहुत सारी समस्याओं का समाधान मिनटों में प्राप्त हो जाता है लेकिन ई-कॉमर्स पर ऐसा कुछ नहीं होता है।
  • ऑनलाइन सामान खरीदने पर पैसों का भुगतान करने के बाद भी लोगों को अपने सामान का इंतजार करना पड़ता है।
ई-कॉमर्स

ई-कॉमर्स पर अपना बिजनेस केसे शुरू करे?

खुद का या मौजूदा मार्केटप्लेस तय करें

 भारत में खुद का E-commerce बिजनेस शुरू करने के लिए सबसे पहले उद्यमी को इस बात का फैसला लेना है कि मार्केटप्लेस स्थापित करना चाहता है या फिर पहले से उपलब्ध किसी मार्केट के साथ जोड़कर इस तरह का बिजनेस करना चाहता है। कहने का मतलब यह है कि भारत में इस तरह का बिजनेस करने के दो तरीके हैं पहला यह कि उद्यमी खुद की ई-कॉमर्स वेबसाइट स्थापित करके अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है और दूसरा वह पहले से किसी प्रसिद्ध मार्केटप्लेस के माध्यम से उत्पाद बेच कर भी इस तरह का बिजनेस कर सकता है।

अपनी E-Commerce कम्पनी रजिस्टर्ड करे

जो खुद का ऑनलाइन स्टोर स्थापित करके इस तरह का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं उन्हें नियमों के मुताबिक अपने व्यवसाय को रजिस्टर करने की आवश्यकता होती है। उद्यमी चाहे तो अपना व्यवसाय को पार्टनरशिप या फिर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर भी रजिस्टर कर सकता है। अपने व्यवसाय को वैधानिक रूप देने के लिए लागू किए गए नियमों के अनुरूप जीएसटी के आवेदन की भी आवश्यकता हो सकती है।

ऑनलाइन स्टोर के लिए डोमेन नाम बुक करें

 उद्यमी ने अपने बिजनेस को वैधानिक स्वरूप प्रदान कर दिया है और बिजनेस के नाम से बैंक खाता जीएसटी रजिस्ट्रेशन आदि प्रक्रियाएं कर ली है तो उसका अगला कदम अपने ऑनलाइन स्टोर के लिए बिजनेस से मिलता-जुलता डोमेन नाम बुक करने का होना चाहिए। डिजिटल दुनिया में अपना नाम बनाने की और ग्रसित होने के लिए उसे अनिवार्य रूप से डोमेन नाम की आवश्यकता होती ही है क्योंकि  यह डोमेन नाम उसके बिजनेस की ऑनलाइन पहचान हो सकता है।

ई कामर्स वेबसाइट बनाएं

 अपने ऑनलाइन स्टोर के लिए डोमेन नाम का चुनाव करने के बाद E-commerce बिजनेस करने वाले उद्यमी को ई-कॉमर्स वेबसाइट की स्थापना करनी होगी ।इसके लिए उसे किसी वेब डेवलपर की मदद लेनी होगी या फिर किसी ऐसी कंपनी से संपर्क करना होगा जो पहले से निर्मित ऑनलाइन स्टोर प्रदान करती है। अगर उसने खुद का कस्टम स्टोरी स्थापित करना चाहता है तो वह किसी वेब डेवलपर या एजेंसी से संपर्क करके अपना यह काम कर सकता है।

 विक्रेताओं को रजिस्टर करें

 आनलाईन स्थापित करने के बाद उद्यमी का सबसे पहला कदम आसपास के व्यक्ति विक्रेताओ से मिलने का होना चाहिए क्योंकि अगर आपके साथ कोई विक्रेता जुड़ेगा नहीं तो आप भेजोगे क्या?

पेमेंट गेटवे

खुद का ई कॉमर्स शुरू कर रहे हो धनी ने अगर विभिन्न विक्रेताओं को अपने साथ जोड़ लिया हो तो अब उसे एक पेमेंट गेटवे की भी आवश्यकता होगी। कहने का मतलब यह है कि उसका ऑनलाइन स्टोर स्थापित करने वाले व्यक्ति को ग्राहक के भुगतान को क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग इत्यादि के माध्यम से संसाधित करने के लिए पेमेंट गेटवे की आवश्यकता होती है।

लॉजिस्टिक का प्रबंध का प्रबंध करना

जैसे ही हम सबको विदित है कि जब ग्राहक द्वारा ऑनलाइन सामान खरीद लिया जाता है तो जिस ऑनलाइन स्टोर से उसने यह सामान खरीदा है उसकी जिम्मेदारी उसके दिए गए पते तक उस सामान को सुरक्षित पहुंचाना होता है। इसीलिए अब इकॉमर्स बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमी को अगला कदम किसी लॉजिस्टिक कंपनी से संपर्क करने का होता है।ऐसे कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट करना चाहिए जो सस्ते दामों पर सर्विस देने के लिए तैयार हो।

इंटरनेट पर उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाए

यदि किसी उद्यमी ने खुद का इकॉमर्स बिजनेस शुरू करने हेतु सभी प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली है तो उसे उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की आर्थिक प्रयास करनी चाहिए। इसके अलावा उद्यमी एफिलिएट मार्केटिंग का भी सहारा ले सकता है क्योंकि इसमें लोग अपनी कमाई करने के वशीभूत होकर आपके स्टोर को प्रमोट करेंगे जिससे मैं खुद और आपकी भी कमाई कर पाने में सक्षम होंगे। इस तारा ऑफ कॉमर्स पर बिजनेस करके अच्छे पैसे कमा सकते हैं।

Conclusion

प्रिय दोस्तों उम्मीद करते हैं के आपको हमारा आर्टिकल के माध्यम से समझ आ गया होगा कि ई कॉमर्स (E-commerce) क्या होता है और ई-कॉमर्स पर बिजनेस कैसे शुरू किया जाता है आगे भी इसी तरह आपको अपना आर्टिकल के माध्यम से और विषयों के बारे में जानकारी प्रदान करती रहूंगी अगर आपको कोई कठिनाई आए तो आप हमसे नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं आप का कमेंट हमारे लिए महत्वपूर्ण है।

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