महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है- DA का कैलकुलेशन कैसे होता है, DA फुल फॉर्म हिंदी में जाने

Mehgai Bhatta Kya Hota Hai और महंगाई भत्ता का कैलकुलेशन कैसे होता है एवं DA Ki Full Form Kya Hoti Hai जाने हिंदी में

वर्तमान समय में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को उनके मूल वेतन से बढ़कर दी जाने वाली राशि महंगाई भत्ता कहलाती है जोकि आज के समय में महंगाई को देखते हुए एवं उनका निवारण करने हेतु यह व्यवस्था की गई है जिसके द्वारा कर्मचारियों में बढ़ोतरी को लेकर एक व्यवस्था बनाई गई है जिसके द्वारा मूल वेतन मैं वृद्धि की जाती है जिससे कर्मचारियों के घर परिवार पर किसी भी प्रकार की कोई दुश्वारियां का सामना ना करना पड़े। का मुख्य आशय सरकारी कर्मचारी एवं निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के खान-पान रहन-सहन में सामान्य जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए किया जाता है। Mehgai Bhatta एक प्रकार का बोनस होता है जो हर महीने बढ़कर प्राप्त होता है। जोकि वर्तमान समय में इतनी महंगाई को देखते हुए आवश्यक माना गया है।

Mehgai Bhatta Kya Hota Hai

महंगाई भत्ता सरकारी एवं निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के जीवन स्तर में होने वाले निम्न बदलाव को कम करने के लिए चालू किया गया इसकी शुरुआत सर्वप्रथम मुंबई से सन 1972 ईस्वी से की गई जोकि काफी ज्यादा सफल भी हुई इससे कर्मचारियों के जीवन स्तर में काफी हद तक बदलाव भी देखा गया इन्हीं बदलाव को देखते हुए केंद्र सरकार अथवा राज्यों की सरकारों ने Mehgai Bhatta देना आरंभ किया जो अब विशेष तौर पर निजी क्षेत्रों में भी मिलने लगा है इसमें खानपान रहन-सहन पढ़ाई लिखाई सभी प्रकार की सुविधाओं को जोड़ा गया है और उसका अलग से सरकार द्वारा या फिर निजी कंपनियों द्वारा तनख्वाह से अलग धनराशि दी जाती है जिसमें सभी प्रकार की सुविधाओं को जोड़कर देना होता है।

महंगाई भत्ता

मौलिक अधिकार क्या है

DA की फुल फॉर्म

DA का फुल फॉर्म Dearness Allowance होता है,जिसे हिंदी में महंगाई भत्ता कहते है, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों को सर्वप्रथम महंगाई भत्ता देना प्रारंभ किया गया था। जिसके अंतर्गत खाद एवं खानपान के लिए अलग से धनराशि दी जाती थी। जिससे उनकी मासिक आय में वृद्धि हो जाती थी इस तरह कुछ कुछ समय पर इन भत्तों में बढ़ोतरी होती रहती थी।भारत में सर्वप्रथम 1972 में मुंबई में कपड़ा उद्योग इंडस्ट्री में महंगाई भत्ता देने की परंपरा शुरू हुई, जो काफी सफल साबित हुई।इसी के पश्चात भारत सरकार ने भी अपने सभी कर्मचारियों को Mehgai Bhatta देने की सहमति जताई।जिसका मुख्य आशय देश में बढ़ रही महंगाई उनके कर्मचारियों पर भार न साबित हो इसलिए 1972 में कानून भी पारित किया गया वो यह था कि ऑल इंडिया सर्विस एक्ट 1951 में जो भी कर्मचारी आते हैं उन्हें सरकार द्वारा महंगाई भत्ता देना अनिवार्य किया जाएगा।

महंगाई भत्ता का कैलकुलेशन

हर वर्ष जनवरी एवं जुलाई माह में महंगाई भत्ते की गणना कराई जाती है केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2006 में महागाई भत्ता कैलकुलेशन में कुछ संशोधन किया गया था यह था कि पिछले 12 महीने का सीपीआई का जो औसत था यानी 115.76 से उसे भाग दिया जाएगा और फिर प्राप्त अंक में 100 से गुना कर दिया जाएगा अतः प्राप्त अंक ही Mehgai Bhatta के रूप में सामने आएगा। जिससे कर्मचारियों में दिया जाएगा इस तरह से यह केंद्र सरकार के द्वारा कैलकुलेशन का स्तर जांचा जाता था जो आज भी यही चलता आया है। जहां कैलकुलेशन सभी कर्मचारियों की सीपीआई वैल्यू पर आधारित है।

सरकार द्वारा महंगाई भत्ता हेतु जानकारी

हाल ही में सातवें वेतन आयोग आने पर केंद्र सरकार ने सभी कर्मचारियों को Mehgai Bhatta 17 फ़ीसदी से बढ़ाकर 28 फीसदी करने का फैसला लिया है,जोकि गत वर्ष एक जुलाई से लागू भी कर दिया गया है या फैसला सरकार ने कर्मचारियों को महंगाई से बचाव के लिए किया है प्रत्येक वर्ष जनवरी और जुलाई में इसे कैलकुलेट करके दिया जाता है शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार से दिया जाता है। परंतु यह भी ज्ञात हो की Dearness Allowance आयकर के दायरे में भी आता है जिसमें कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर इसकी समीक्षा प्रत्येक तीन माह पर की जाती है यह केंद्रीय कर्मचारी राजकीय कर्मचारी तथा निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों तीनों पर लागू होती

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