नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत क्या होती है और इन सब में क्या अंतर है?

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नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत क्या होती है | नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत में क्या अंतर है | नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत के कार्य क्या है

आज हम आपको अपने इसलिए के माध्यम से नगर निगम नगर पालिका एवं नगर पंचायत के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं क्योंकि बहुत सारे लोगों को अभी भी नगर निगम एवं नगरपालिका को एक ही विभाग समझते हैं और ज़्यादातर लोगो को इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी प्राप्त नहीं है। आज हम आपको बहुत ही सरल भाषा में इन तीनों के कार्य एवं अंतर के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं।

नगर पालिका क्या है ?

जिस क्षेत्र की आबादी 20000 या उससे अधिक होती है वह नगर पालिका में आते हैं। देखा जाए तो आमतौर पर यह एक कस्बा गांव या छोटे समूह के रूप में होती हैं। नगरपालिका का चेयरमैन प्रशासनिक अधिकारी होता है जिस के कंधों पर नगर परिषद यह नगर पालिका परिषद का कंट्रोल होता है नगर पालिका अध्यक्ष श्री प्रशासनिक अधिकारी होता है। भारत देश में एक नगर पालिका को एक शहर के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह 1 ग्राम या फिर 1 बड़े शहर के बराबर नहीं होता है। जैसे कि हमने आपको अभी ऊपर बताया कि 20000 या उससे अधिक लोगों को मिलाकर नगर पालिका बनता है लेकिन अगर यह जनसंख्या 500000 से ऊपर पहुंचती है तो यह नगर निगम बन जाता है।

नगरपालिका को बहुत सारे अधिकारों के अलावा कुछ कर्तव्यों का भी पालन करना पड़ता है। 74 वें संशोधन अधिनियम के अंतर्गत नगर पालिका संवैधानिक आता है। एक नीति कानून के अनुसार अनुच्छेद 243Q के अंदर साफ-साफ लिखा गया है कि हर राज्य के लिए ऐसी इकाई का निर्माण होना अनिवार्य होगा ।

नगर पालिका के कार्य

  • सास ने शहर के अंदर जल की व्यवस्था उपलब्ध कराना
  • इसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में अस्पतालों की देखभाल एवं उनकी समय-समय पर जांच करवाना।
  • शहर में बनी सड़कों के निर्माण कार्य एवं जांच करना।
  • शहर में कूड़ा और जल निकास के लिए सुविधा उपलब्ध कराना
  • बच्चों के लिए शहरों में पार्क और खेल के मैदानों को स्वच्छ एवं साफ रखना।
  • शहर में जन्म एवं मृत्यु के रिकॉर्ड का पंजीकरण करवाना।
  • गरीब क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा संबंधी सहुलत प्रदान करें।

नगर पालिका की इनकम

  • शहर के अंदर घरों, मनोरंजन के साधन, बिजली, फिल्टर पानी, वाहन संपत्ति और भूमि सहित टैक्स से होने वाली इनकम
  • शहर के अंदर बनी सड़क पर टोल टैक्स से होने वाली आय
  • रेन बसेरा, होटल, पर्यटन के अंदर, किराए पर कमरा, सत्ता नगर पालिका की संपत्ति किराए पर देकर, से होने वाली आय
  • शहर के अंदर सभी नियोक्ताओं , सरकारी और निजी क्षेत्र में व्यावसायिक लोगों से कर संग्रह

नगर निगम क्या है ?

कस्बों, बस्ती चार्टर, बस्ती गांव और नगर सहित जगहों के लिए प्रयुक्त नगर निगम एक स्थानीय शासन इकाई के लिए कानूनी नाम होता है। जैसे कि एक स्थानीय सरकार के रूप में दो लाख या उससे अधिक आबादी के एक शहर को प्रशासन करता है। नगर निगम राज्य सरकार के साथ पंचायती राज प्रणाली के तहत सीधे कांटेक्ट रखता है। देखा जाए तो भारत में सबसे बड़े नगर निगम दिल्ली, कोलकाता चेन्नई और मुंबई में है।

नगर निगम के कार्य

  • नगर निगम द्वारा प्रदेश में उपयोग में आने वाली भूमि और भवन के निर्माण का विनियम कार्य करवाना।
  • प्रदेश के नियम आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजनाएं बनवाना।
  • योजनाओं को लोगों के विकास एवं हित के लिए लागू करवाना।
  • क्षेत्र के अंदर स्वास्थ्य सर्वे की पूर्ण व्यवस्था करवाना।
  • आर्थिक स्थिति से कमजोर बच्चों की शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करवाना।
  • तत्कालीन की स्थिति में अग्निशामक सेवाओं की सुविधा शहर के अंदर उपलब्ध करवाना

नगर निगम की इनकम

  • शहरों के अंदर पानी की व्यवस्था से, बाजार में और वाहनों द्वारा कर वसूल करने से, अन्य कार्यों से नगर निगम की आय होती हैं ।
  • एक नगर निगम की आय देश के अंदर वाहनों के चालान , तथा उन पर कर लगाकर होती है।
  • एक नगर निगम की आय का स्त्रोत प्रदेश के अंदर आ रहे पुलिस स्टेशन से भी कुछ आए होती है
  • प्रदेश के अंदर हो रहे तहसील के कार्यों से भी आय स्त्रोत
  • प्रदेश में चलाए जाने वाले समय समय पर कार्यक्रम ने प्राप्त अनुदान राशि की आय

 नगर पंचायत क्या है ?

नगर पंचायत सरकार की स्थाई इकाई होती है यह सभी गांवों पर समान रूप से कार्य करती हैं इसलिए इसे प्रशासनिक ब्लॉक भी कहते हैं। अगर हम आपको सरल भाषा में बताएं तो यह ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की मजबूत कड़ी होती है और अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे आंध्र प्रदेश में इसे मंडल प्रजा परिषद और गुजरात में तालुका पंचायत तथा कर्नाटक में मंडल पंचायत। किसी भी ग्राम सभा में 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना अनिवार्य है क्योंकि हर गांव में एक प्रधान होता है। इस आधार पर एक हजार आबादी वाले गांवों में 10 पंचायत सदस्य और 3000 की आबादी वाले गांव में 15 सदस्य होते हैं।

  • साल में लगभग 2 बार ग्राम सभा की बैठक होना अनिवार्य होता है जिसकी सूचना 15 दिन पहले नोटिस से दी जाती है। ग्रामसभा की बैठक बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को होता है. बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति जरूरी होती है।
  •  ग्राम पंचायत द्वारा तैयार किए गए सभी भावी योजनाओं को इकट्ठा करके पंचायत समिति उनका वित्तीय प्रबंध का समाज कल्याण और और क्षेत्र विकास को ध्यान में रखते हुये लागू करवाती है तथा वित्त पोषण के लिए उनका क्रियान्वयन करती है।

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