|POA Full Form| पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है- Power Of Attorney, मुख्तारनामा या अधिकार पत्र

पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है | POA Ki Full Form Kya Hoti Hai | Type Of Power Off Attorney | पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन कैसे करवाए

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पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है | POA Ki Full Form Kya Hoti Hai  | मुख्तारनामा या अधिकार पत्र | Type Of Power Off Attorney | पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन कैसे करवाए

आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले हैं क्योंकि कभी ना कभी हमें अपनी प्रॉपर्टी या व्यवसाय को सुरक्षित और आगे बढ़ाने के लिए बहुत सारे फैसले लेने पढ़ते है और कभी कभी प्रॉपर्टी और व्यवसाय से जुड़े कार्य करने में लोगों के साथ धोखाधड़ी भी हो जाती है इन्हीं सब समस्याओं से बचने के लिए कानूनी रूप से कार्य किया जाना ही हम सभी को उचित लगता है। वैसे तो पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल कानूनी तौर पर बरसों से किया जाता है लेकिन आज के समय में धोखाधड़ी ओर फ्रॉड से बचने के लिए अब ज़्यादातर लोग Power Of Attorney के लिए जागरूक होने लगे है।

 पॉवर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल संपत्ति बेचने और खरीदने के लिए किया जाता है जिससे कि लोगों को कानूनी तौर पर आसानी से मदद हो सके। तो चलिए फिर आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से Power Of Attorney से संबंधित सभी में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करने वाले हैं क्योंकि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में विस्तार से मालूम नहीं होता है। यदि आप भी पॉवर ऑफ अटॉर्नी के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

Power Of Attorney Kya?

पावर ऑफ अटॉर्नी जिसे हिंदी भाषा में मुख्तारनामा भी कहा जाता है। इसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज माना जाता है जिससे कि लोगों को अपनी संपत्ति या व्यवसाय खरीदने या बेचने के दौरान सरकारी तौर पर काफी सहायता मिल जाती है, और आसानी भी होती है। जिन लोगो से अपना बिजनेस सही से नहीं चलाया जाता वे पावर ऑफ अटॉर्नी के उपयोग से कार्य करने में सक्षम हो जाते हैं। यह एक प्रकार का लिखित पत्र होता है जिसमें कोई व्यक्ति अपना बिजनेस या प्रॉपर्टी को संभाल ने का कार्यभार एक जिम्मेदार व्यक्ति को कानूनी तौर पर प्रतिनिधित्व बनाकर कर सकता है। जिस व्यक्ति को प्रतिनिधि बनाकर कार्य सौंपा जाता है उसे एजेंट कहा जाता है और जो प्रतिनिधित्व बनाता है उसे प्रिंसिपल कहा जाता है।

  • Power Of Attorney बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है जिसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाना जरूरी होता है।
  • बनाया गया प्रतिनिधित्व प्रिंसिपल के बदले सभी प्रकार के कानूनी वित्तीय लेनदेन एवं दूसरे कार्य को करने के लिए कोई भी फैसला ले सकता है क्योंकि वह प्रतिनिधित्व प्रिंसिपल के बदले काम करता है। एजेंट द्वारा लिया गया फैसला कानूनी तौर पर माननीय होता है।
  • यदि प्रतिनिधि बनाने वाले को कोई नुकसान होता है तो उसकी भरपाई एजेंट द्वारा की जाएगी। Power Of Attorney किसी अचल संपत्ति के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने के लिए तैयार की जाती है।
पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है

पावर ऑफ अटॉर्नी कितने प्रकार की होती है?

पॉवर ऑफ अटॉर्नी दो प्रकार की होती है पहली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी और दूसरी स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी।

 जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी

जनरल पॉवर ऑफ अटॉर्नी उसे कहते है जिसमें किसी भी व्यक्ति को किसी खास कार्य के लिए Power Of Attorney या मुख्तारनामा दिया जाता है। इस पॉवर ऑफ अटॉर्नी में बनाया गया प्रतिनिधित्व बहुत सारे फैसले लेने में निपुण होता है। जब कभी प्रॉपर्टी बेचना या खरीदना हो तब यह काम जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के अंतर्गत आता है। जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी का दायरा स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी का दायरा से बड़ा होता है। जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी कभी भी कैंसल किया जा सकता है। कभी भी उसको खत्म किया जा सकता है.और ऐसे खत्म करने के बाद जिसके नाम से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी बनाया गया है उसको एक नोटिस दिया जाता है। लिखित में भी नोटिस भेज दिया जाता है।

जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी

 स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी

Special Power Of Attorney के माध्यम से पैसे और प्रॉपर्टी से संबंधित निर्णय लेने में शक्ति मिलती है क्योंकि स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी किसी भी खास कार्य के लिए दी जा सकते हैं। इस पॉवर ऑफ अटॉर्नी में कई प्रकार के कार्य आते हैं जैसे प्रबंध बैंक , बिल्डिंग सोसायटी, अकाउंट, बिलों का भुगतान एकत्रित करना और घर बेचना आदि। कई बार तो किसी समस्या से निपटने के लिए भी स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग किया जाता है जिससे सारे मामले सुलझ जाते हैं। एक बार सार्वजनिक अभिभावक के कार्यालय के साथ पंजीकृत होने के बाद, इसका तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी

किस स्थिति में पॉवर ऑफ अटॉर्नी मान्य है

  • यदि अगर प्रतिनिधित्व बनाने वाला व्यक्ति बनाया गया प्रतिनिधि दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है तो Power Of Attorney माननीय नहीं रहती है अमान्य हो जाते हैं।
  • अगर किसी दुर्घटना के कारण प्रिंसिपल साइन करने योग्य नहीं रहता है तो उसके द्वारा की गई पावर ऑफ अटॉर्नी की सीमा खत्म हो जाती है और इसी के साथ-साथ साइन की गई पहले की पावर ऑफ अटॉर्नी को भी कैंसिल कर दिया जाता है।
  • स्पेशल पॉवर ऑफ अटॉर्नी को कार्य पूरा करने के बाद दोनों पक्षों की सहमति से खत्म किया जा सकता है।
  • जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी को कभी भी रद्द किया जा सकता है।
  • Power Of Attorney की निर्धारित सीमा लगभग 1 वर्ष की होती है यदि 1 वर्ष के अंदर एजेंट किसी प्रकार का दुरुपयोग करता है तो कानूनी तौर पर उसकी शिकायत दर्ज करवा कर आप इसे रद्द भी करवा सकते हैं।
पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है

Registration Of Power Off Attorney

जैसे कि आप सभी लोग जानते हैं कि Power Of Attorney का चलन काफी समय पहले से है लेकिन लोगों में जागरूकता अब आई है। वैसे तो पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन करवाना इतना जरूरी नहीं है लेकिन अगर आप रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं तो इसका महत्व ज्यादा हो जाता है

  • जो लोग किसी अचल संपत्ति से जुड़े हुए हैं उन लोगों को Power Of Attorney का रजिस्ट्रेशन अवश्य करवाना चाहिए क्योंकि ऐसे लोगों के लिए इसका महत्व बहुत ज्यादा है।
  • जिन जगहों पर रजिस्ट्रेशन अधिनियम 98 लागू होता है इसको सब रजिस्ट्रार के पास के जाकर रजिस्ट्रेशन करवा लेना चाहिए। बाकी जगह पर आप नौटरी के पास जाकर या किसी प्रशासनिक अधिकारिय के पास जाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
  • इसके रजिस्ट्रेशन को करवाते समय आपके पास दो या दो से अधिक सबूतों का होना बहुत जरूरी है। रजिस्ट्रेशन होने के बाद प्रिंसिपल को Executant और इसे पाने वाले को GPA या SBI होल्डर कहा जाता है। किसी प्रकार की धोखाधड़ी रोकने के लिए एवं पंजीयन के लिए राज्य शासन को नियमों में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है।
  • Power Of Attorney में प्रॉपर्टी बेचने का अधिकार परिवार के सदस्यों को ही होगा। इसके लिए 1000 रुपए की स्टांप ड्यूटी और 500 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।
Power Off Attorney

विदेश में पॉवर ऑफ अटॉर्नी केसे बनाई जाती हैं?

यदि कोई व्यक्ति विदेश में रहता है और भारत में उसकी संपत्ति है और वह इसे बेचना चाहता है तो भारत में किसी भी प्रॉपर्टी को डील करने के लिए विदेशों में भी Power Of Attorney को तैयार करके उसे रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। परंतु यदि देश के बाहर कराए जाने की स्थिति में देश आने से 3 माह के अंदर इसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से मान्यता दिलाना आवश्यक हो जाता है। कई बार ऐसी स्थिति भी आती है ,जब व्यक्ति विदेश में रहे और बगैर आए अपने संपत्ति को बेचना चाहता है ,तो ऐसे में Power of Attorney तैयार कर उसे नोटराइज्ड करा सकते हैं। जिससे कार्य आसान हो जाता है और आगे कोई दिक्कत नहीं आती है।

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