जीडीपी (GDP Full Form ) क्या होती है – सकल घरेलू उत्पाद संपूर्ण जानकारी हिंदी में

जीडीपी (GDP Full Form ) क्या होती है | जीडीपी की महत्वपूर्ण उपलब्धियां | सकल घरेलू उत्पाद संपूर्ण जानकारी हिंदी में

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जीडीपी क्या होती है | GDP Full Form Kya Hai |  जीडीपी कैसे बनती है | जीडीपी का मतलब क्या होता है | Grass Domestic Product (GDP) Price

जीडीपी को सबसे पहले अमेरिका के एक अर्थशास्त्री साइमन ने 1934-44 के दौरान उपयोग किया था। इस शब्द का परिचय सबसे पहले अमेरिका में साइमन ने कराया था। यह उस समय की बात है जब विश्व की बैंकिंग संस्थाएं आर्थिक विकास का अनुमान लगाने का कार्यभार संभाल रही थी उनमें से ज्यादातर को एक शब्द इसके लिए नहीं मिल पा रहा था। लेकिन जब सामने इस शब्द से अमेरिकी कांग्रेस में जीडीपी शब्द को एक्सप्लेन करके दिखाया तो उसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इस शब्द का उपयोग करना आरंभ कर दिया। तो आइए आज हम आपको जीडीपी या सकल घरेलू उत्पाद संबंध संपूर्ण जानकारी इस पोस्ट के माध्यम से आपको प्रदान करेंगे।

Grass Domestic Product (GDP)  Kya Hai

Grass Domestic Product (GDP)  किसी भी देश की आर्थिक व्यवस्था को मापने के लिए जीडीपी  का प्रयोग किया जाता है। भारत में जीडीपी की गणना हर 3 महीने में की जाती है। जीडीपी का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के प्रमुख उत्पादन क्षेत्र में उत्पादन की वृद्धि दर पर निर्भर होता है। जीडीपी के अंतर्गत कृषि, उद्योग एवं सेवा तीन प्रमुख घटक होते हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने या घटने के आधार पर जीडीपी दर देखी जाती हैं। जीडीपी को दो प्रकार से प्रस्तुत किया जाता है पहला उत्पादन की कीमत महंगाई के साथ घटती बढ़ती रहती हैं।यह कोन्टैंट प्राइस का पैमाना है जिसके अंतर्गत जीडीपी की दर उत्पादन का मूल्य एक आधार वर्ष में उत्पादन की कीमत पर तय होता है। और दूसरा करंट प्राइस पैमाना है जिसके अंतर्गत उत्पादन वर्ष की महंगाई दर शामिल होती है।

 1- कॉन्स्टैंट प्राइस- भारत का सांख्यिकी विभाग द्वारा उत्पादन व सेवाओं के मूल्यांकन के लिए एक आधार वर्ष तय करता है।इस वर्ष के दौरान कीमतों को आधार बनाकर उत्पादन की कीमत पर वृद्धि दर तय की जाती हैं और यही कांस्टेंट प्राइस जीडीपी है। जीडीपी की दर को महंगाई से अलग रखकर सही ढंग से मापने के लिए ऐसा किया जाता है।

2- करंट प्राइस- जीडीपी के उत्पादन मूल्य में अगर महंगाई की दर को जोड़ दिया जाए तो हमें आर्थिक उत्पादन की मौजूदा कीमत हासिल हो जाती है। इसका मतलब यह है कि कांस्टेंट प्राइस जीडीपी को तत्कालिक महंगाई दर से जोड़ना होता है।

जीडीपी

जीडीपी जनता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

सकल घरेलू उत्पाद जनता के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार और लोगों के लिए फैसले करने का एक महत्वपूर्ण ट्रैक्टर साबित होता है।अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब यह है कि देश की आर्थिक गतिविधियों में अच्छा काम किया जा रहा है और सरकार की नीतियां जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित हो रही है और देश सही दिशा में जा रहा है। सरकार के अलावा कारोबारी, स्टॉक मार्केट, इन्वेस्ट और अलग-अलग नीति निर्धारक जीडीपी डाटा का इस्तेमाल सही फैसले करने में पढ़ते हैं।जब देश की अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती है तो कारोबारी और ज्यादा पैसा निवेश करता है और उत्पादन को पढ़ाते हैं क्योंकि भविष्य को लेकर वह निश्चित हो जाते हैं।इसी प्रकार से नीति निर्धारक जीडीपी डाटा का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था की मदद के लिए नीतियां बनाने में करते हैं और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए एक पहनाने के तौर पर उपयोग किया जाता है।

GDP Full Form

जीडीपी के 4 मुख्य घटक जिसके तहत आकलन किया जाता है

पहला घटक ‘कंजम्पशन एक्सपेंडिचर’ है, यह गुड्स और सर्विसेज को ख़रीदने के लिए लोगों के कुल ख़र्च को कहते हैं। दूसरा ‘गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर’, तीसरा ‘इनवेस्टमेंट एक्सपेंडिचर’ है और आख़िर में नेट एक्सपोर्ट्स आता है। जीडीपी का आकलन नोमिनल और रियल टर्म में होता है। नॉमिनल टर्म्स में यह सभी वस्तुओं और सेवाओं की मौजूदा क़ीमतों पर वैल्यू है।रियल जीडीपी को ही हम आमतौर पर अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के तौर पर मानते हैं।जीडीपी के डेटा को आठ सेक्टरों से इकट्ठा किया जाता है। इनमें कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी, गैस सप्लाई, माइनिंग, क्वैरीइंग, वानिकी और मत्स्य, होटल, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और कम्युनिकेशन, फ़ाइनेंसिंग, रियल एस्टेट और इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विसेज़ और कम्युनिटी, सोशल और सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं।

अभी भी जीडीपी हर चीज को कवर नहीं करती

  • जीडीपी में कई सेक्टरों को कवर किया जाता है ताकि अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का आकलन किया जा सके, लेकिन यह अभी भी हर चीज़ को कवर नहीं करती है।विशेषज्ञों का मानना है कि जीडीपी डेटा में असंगठित क्षेत्र की स्थिति का पता नहीं चलता है।
  • वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रोफे़सर अरुण कुमार कहते हैं, “जीडीपी डेटा में असंगठित सेक्टर को शामिल नहीं किया जाता है जो देश के 94 फ़ीसदी रोज़गार का उत्तरदायित्व उठाता है।”अगर जीडीपी निगेटिव दायरे में आ जाती है तो इसका मतलब है कि असगंठित क्षेत्र का प्रदर्शन संगठित सेक्टर के मुक़ाबले और ज़्यादा बुरा है।”

बीते वर्ष से जीडीपी में गिरावट

  • कई एजेंसियाँ और विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2021-22 में चार से 15 फ़ीसदी तक कमज़ोर हो सकती है।भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था नकारात्मक दायरे में जाएगी। हालाँकि आरबीआई ने यह नहीं बताया है कि जीडीपी में कितनी गिरावट आएगी।
  • यह चीज़ ध्यान में रखने वाली है कि भारतीय अर्थव्यवस्था गुज़रे चार साल से सुस्ती में चल रही है।
  • साल 2016-17 में जीडीपी 8.3 फ़ीसदी से बढ़ी थी। इसके बाद 2017-18 में ग्रोथ सात फ़ीसदी रही। 2018-19 में यह 6.1 फ़ीसदी और 2019-20 में यह गिरकर 4.2 फ़ीसदी पर आ गई।
  • मैक्किंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “कोविड संकट ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। ग्रोथ को बढ़ाने के तत्काल क़दमों की ग़ैर मौजूदगी में भारत में आमदनी और जीवन गुणवत्ता एक दशक के ठहराव में पहुँच सकती है।”
  • कोविड महामारी ने हालात को और बुरा कर दिया है और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दूसरे एशियाई देशों के मुक़ाबले रिकवरी करने में भारत को ज़्यादा वक़्त लग सकता है।

जीडीपी गिरने पर आम आदमी पर क्या असर पड़ता ?

देश की जीडीपी में तेज गिरावट आई तो उसका आम इंसान पर कितना प्रभाव पड़ेगा? आम आदमी की जिंदगी पर जीडीपी गिरने का कोई असर नहीं पड़ता बल्कि यह कहना बेहतर होता है कि आपकी जिंदगी में आशिकी दुश्वारियां को ही जीडीपी का आंकड़ा गिरावट के  तौर पर सामने रखता है। भविष्य के लिए यह भी अच्छा नहीं है कि अर्थव्यवस्था अगर मंदी हो जाती है तो बेरोजगारी का खतरा बढ़ जाता है जिस तरह आम आदमी की कमाई होने की खबर सुनकर खर्च कम और बचत ज्यादा करने लगता है बिल्कुल ऐसे ही व्यवहार कंपनियां भी करने लगती हैं और सरकारी नौकरियां मिली भी कम हो जाती है। जिसके तहत लोगों को नौकरी से निकालने का सिलसिला तेजी से बढ़ता जाता है। CMEI के मुताबिक  जुलाई महीने में 50 लाख लोग बेरोजगार हुए।इस तरह घबरा कर लोग खर्च कम करते है |

1-जीडीपी ग्रोथ-  मनमोहन सरकार ने वर्ष 2009 से 2014 के बीच अर्थव्यवस्था लगभग 6.7% से बढ़ रही थी लेकिन मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था वर्ष 2014 से 2019 के बीच 7.5% की दर से बढ़ी है।

2-ऑटोमोबाइल बिक्री-  मनमोहन सरकार में मोटरसाइकिल की बिक्री में 12.44% प्रति वर्ष और कारों की बिक्री में 7.92% प्रतिवर्ष के हिसाब से बढ़ोतरी होती थी। लेकिन मोदी सरकार ने इस वृद्धि दर को घटाकर मोटरसाइकिल की बिक्री में 5.35% प्रतिवर्ष और कारों की बिक्री में 4.42% प्रतिवर्ष कर दिया है।

3- एयरलाइंस- मनमोहन सरकार में यात्रियों की बढ़ोतरी 9.20% की दर से होती थी लेकिन मोदी सरकार ने यह दर बढ़ाकर 15.28% कर दी गई है कर दी है।

4-प्रत्यक्ष कर संग्रह- मनमोहन सरकार के 5 वर्षों में प्रत्यक्ष कर 17.53% की दर से बढ़ रहा था वही मोदी सरकार में प्रत्यक्ष कर 16.85% की दर से कर दिया गया है।

5-हाईवे निर्माण- मनमोहन सरकार के दौरान वर्ष 2009 से 2014 के बीच कुल 20.639किलोमीटर हाईवे का निर्माण हुआ था वही मोदी सरकार द्वारा 5 वर्षों में 44.389 किलोमीटर हाईवे का निर्माण हुआ है।

6- महंगाई-मनमोहन सरकार के समय में महंगाई की दर 7.72% लेकिन मोदी सरकार के समय में यह दर घटकर 2.57 ही रह गई है

जीडीपी

जीडीपी की विशेषताएं

  • सकल घरेलू उत्पाद में केवल घरेलू उत्पादों को ही शामिल किया जाता है।
  • सकल घरेलू उत्पाद से अर्थव्यवस्था की गतिविधियों का पता चलता रहता है
  • जीडीपी के माध्यम से देश की आर्थिक स्थिति सुधार आयेगा।
  • एक देश की सकल घरेलू उत्पाद को दूसरे देश की सकल घरेलू उत्पाद से तुलना करके पता किया जा सकता है कि दूसरे देशों के मुकाबले हमारे देश की आर्थिक स्थिति कैसी है।
  • सकल घरेलू उत्पाद में निर्यात को जोड़ा और आयात को घटाया जाता है।

जीडीपी की गणना

देश की जीडीपी याद करने के लिए इन सभी के मूल्य को जोड़ा जाता है। इन सभी नंबरों को जोड़कर एक नंबर निकलता है जिसे जीडीपी कहते हैं।

GDP=C+I+G+(X-M)

C= Consumer

Expenditure( उपभोक्ता खर्च)

I= industries investment (उद्योग निवेश)

G= government

Expenditure (सरकारी खर्च)

X=export (निर्यात)

I=import (आयात)

सकल घरेलू उत्पाद

देश GDP कब बढ़ती है?

देश की सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि तब आती है जब देश में आयात कम और निर्यात ज्यादा होता है। साधारण भाषा में अगर देश के लोग घरेलू वस्तुएं खरीदते हैं तो देश की आय बढ़ती है और सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि होती हैं। इसीलिए भारत में मेड इन इंडिया शुरू किया गया है ताकि भारतीय घरेलू वस्तुओं को बढ़ावा दिया जाए और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जाए। देश में घरेलू वस्तुओं को बढ़ावा मिलेगा और तभ ही देश की आर्थिक व्यवस्था सुधार आएगा।

जीडीपी ग्रोथ

वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

एजेंसीताज़ा अनुमान %पूर्व अनुमान %
गोल्डमैन सेश-14.8-11.1
फिच रेटिंग्स-10.5-5
नोमुरा10.8-6.1
एचएसबीसी-7.2
इंडिया रेटिंग्स11.8-5.3

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