चन्द्र ग्रहण (LUNAR ECLIPSE) क्या होता है- उपछाया चंद्र ग्रहण जानकारी हिंदी में

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चन्द्र ग्रहण क्या होता है | Type Of LUNAR ECLIPSE | उपछाया चंद्र ग्रहण कैसे लगता है | चंद्र ग्रहण कब लगता है | छाया चन्द्र ग्रहण क्यों आशुभ माना जाता है

दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं चंद्र ग्रहण की आज है 5 जुलाई और आज LUNAR ECLIPSE लगने वाला है। यह ग्रहण सुबह 8: 36  से 11:22 तक यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पेसिफिक और अंटार्टिका में दिखाई देगा। इस ग्रहण का समय 2 घंटे 43 मिनट का होगा। दोस्तों मैं आपको बता दूं कि लगातार तीसरी बार गुरु पूर्णिमा के शुभ तिथि पर यह चंद्र ग्रहण पड़ रहा है और इसकी खास बात यह है कि इस बार  पूर्णिमा  उपछाया चंद्र ग्रहण पढ़ने जा रहा है।तो दोस्तों क्या आप लोग जानते हैं कि उपछाया चंद्र ग्रहण क्या होता है? ज्यादातर लोगों को पता होता है कि उपछाया चंद्र ग्रहण क्या होता है पर कुछ लोग अभी भी ऐसे हैं जिनको उपछाया LUNAR ECLIPSE की पूरी जानकारी नहीं है |

चंद्र ग्रहण क्या होता है?

दोस्तों हमने हमेशा LUNAR ECLIPSE के बारे में सुना है और कुछ मौके ऐसे भी आए हैं कि हमने चंद्र ग्रहण होते हुए देखा है। फिर भी विस्तार से देखा जाए तो हमें यह समझ नहीं आता है कि चंद्रग्रहण होता  क्या है जिसके हिंदू धर्म में काफी मान्यता है। तो चलिए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण होता क्या है। पहले LUNAR ECLIPSE को समझना काफी मुश्किल होता था। पहले के लोग इसे देवी देवताओं का प्रकोप भी मानते थे पर हमारे वैज्ञानिक ने इतनी तरक्की कर ली है कि हम इसे काफी आसानी से समझ सकते हैं। अगर देखा जाए तो औसत प्रति 10 वर्षों में दस LUNAR ECLIPSE लगते हैं 1 वर्ष की अवधि में अधिक से अधिक  3 और कम से कम 0 चंद्रग्रहण होते हैं।

चंद्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण कब लगता है?

  • जब पृथ्वी चंद्र और सूर्य के बीच में आकर पढ़ने वाली सूर्य की रोशनी को अवरुद्ध कर देती है जिससे के चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है तब LUNAR ECLIPSE लगता है।
  • चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा में ही हो सकती है क्योंकि पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के कक्षा की तुलना में थोड़ी अंतकाल है। इसीलिए ग्रहण के लिए जरूरी पूर्ण संरेखण हर पूर्णिमा में नहीं होता। पूर्ण LUNAR ECLIPSE कभी-कभी ही दिखाई देता है।
  • आमतौर पर पूरी घटना के लिए 2 घंटे का समय तक लग सकता है। चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी की दो छाय चंद्र पर पड़ती हैं।
  • उमरा यानी  छाय के बीच वाला सबसे घना काला हिस्सा और  puembra यानी की बारिक छाया चंद्रमा दो चरणों में अपनी गति के अनुसार इन दोनों मैं से गुजरता है।
  • पूर्ण ग्रहण ब्रह्माणी घटनाओं की एक विचित्र उपलब्धि है। जहां चंद्रमा लगभग  4.5 अरब साल पहले बना था। कब से यह हमारे ग्रह से लगभग 1.6 inch  या 4 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से दूर होता जा रहा है।
  • अभी पृथ्वी की छाया से पूरी तरीके से ढक जाने के लिए चंद्रमा बिल्कुल सही दूरी पर है लेकिन अब से कुछ करोड़ साल में यह स्थिति नहीं रहेगी।
चन्द्र ग्रहण (LUNAR ECLIPSE) क्या होता है

  चंद्र ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?

 LUNAR ECLIPSE टोटल तीन प्रकार के होते हैं

  • पूर्ण चंद्र ग्रहण
  • आंशिक चंद्रग्रहण
  • उपछाया चंद्र ग्रहण।
LUNAR ECLIPSE

साल का दूसरा चंद्रग्रहण

बता दें आगामी 5 जून को लगने वाला LUNAR ECLIPSE यह इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। समय और तिथि के अनुसार, यह चंद्रग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। यह इस साल का दूसरा LUNAR ECLIPSE होगा। चंद्र ग्रहण 5 जून की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर अगली तारीख 6 जून की रात 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। 12 बजकर 54 मिनट पर पूर्ण LUNAR ECLIPSE होगा।

साल का तीसरा चंद्रग्रहण

इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई 2020 को लग रहा है। इस ग्रहण का समय सुबह 8 बजकर 37 मिनट से शुरु होगा और 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। साल का तीसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। 30 नवंबर को साल का आखिरी और चौथा चंद्र ग्रहण लगेगा। इस चंद्र ग्रहण का समय दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से प्रारंभ होगा और शाम 5 बजकर 23 मिनट तक प्रारंभ होगा। यह LUNAR ECLIPSE भारत में दिखाई देगा।

छाया चन्द्र ग्रहण क्यों आशुभ माना जाता है ?

ग्रहण से जुड़ी मान्यताएं कहती हैं कि ग्रहण लगना अशुभ होता है। इस दौरान कई तरह के शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि आगामी ‘स्ट्राबेरी मून एक्लिप्स’ के दौरान चंद्रमा का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा Earth’s penumbra में जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रमा को देखना लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि यह एक प्रथमाक्षर होगा, क्योंकि यह एक चंद्रग्रहण है। स्काई और टेलीस्कोप की एक रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी के पेनम्ब्रा का बाहरी हिस्सा बहुत पीला है, जिसके कारण अधिकांश लोग तब तक कुछ भी नोटिस नहीं कर पाएंगे, जब तक चंद्रमा की धार कम से कम आधे रास्ते में नहीं खिसक जाए। 2020 के अन्य दो पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण 4 जुलाई से 5 जुलाई तक और 29 नवंबर से 30 नवंबर तक होंगे।

उपछाया चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?

जब पृथ्वी चंद्रमा और सूरज के बीच आ जाती है और सूरज की रोशनी चांद पर नहीं पढ़ पाती ऐसे में पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है  इस LUNAR ECLIPSE को चाहे तो नंगी आंखों से देख सकते हैं, लेकिन सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने पर नुकसान पहुंच सकता है।

उपछाया चंद्र ग्रहण क्या होता है?

उपछाया LUNAR ECLIPSE वह होता है जब पृथ्वी सूरज और चांद के बीच तो आती है लेकिन तीनों एक सीधी रेखा में नहीं होते ऐसा तब होता है जब धरती के बीच के हिस्से की छाया जिसे हम उमरा कहते हैं, वह चांद पर नहीं पड़ती है। सिर्फ पृथ्वी के बाहर के हिस्से जिसे penumbra कहते हैं, उसकी ही छाया चांद पर पड़ती है। इस ग्रहण को उपछाया ग्रहण कहते हैं।LUNAR ECLIPSE के दौरान आप नंगी आंखों से ग्रहण वाले चंद में अंतर स्पष्ट नहीं कर सकते क्योंकि पृथ्वी की बहुत ही हल्की सी छाया चांद पर पड़ती है इससे चांद की रोशनी थोड़ी कम हो जाती है।

Conclusion

प्रिय दोस्तों में उम्मीद करती हूं कि आपको मेरे आर्टिकल के माध्यम से समझ आ गया होगा कि LUNAR ECLIPSE क्या होता है और उपछाया चंद्र ग्रहण क्या होता है अथवा वह कैसे लगता है। आगे भी इसी तरह आपको अपना आर्टिकल के माध्यम से और चीजों के बारे में जानकारी प्रदान करती रहूंगी। अगर आपको कोई भी कठिनाई आए तो आप हम से नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं। आप का कमेंट हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है।

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